The Mehra Khandaan Legacy (Hindi)

Book #1 : Ehsaas

हर कोई एक पर्फ़ेक्ट लव-स्टोरी चाहता है। पर रियल लाइफ़ में ऐसा कभी हुआ है क्या?
शायद हाँ, शायद नहीं!

क्या प्यार पर किसी का बस चला है? 
शायद कभी नहीं!

सिद्धार्थ की पर्फ़ेक्ट लव-स्टोरी ख़त्म हो चुकी थी। उसे ज़िंदगी समझौता करने को कह रही थी। समझौते की आड़ में क्या वो किसी और के साथ इंसाफ़ कर पाएगा? क्या वो फिर से किसी और को अपने दिल में जगह दे पाएगा?

नैना को एक ऐसे जीवनसाथी की तलाश है जिसके दिल में, सिर्फ़ और सिर्फ़, वो ही रहे। 
क्या मिल पाएगा उसको ऐसा एक शख़्स? क्या उसकी लव-स्टोरी पर्फ़ेक्ट कहलाएगी? या फिर उसको भी ओरों की तरह ज़िंदगी के हाथों समझौता करना पड़ेगा? या फिर ज़िंदगी उसको यह एहसास दिला देगी कि बड़े दिल वालों को ही पर्फ़ेक्ट लव मिलता है।


Book #2 : Kaali Nazar

मानिए या ना मानिए, दुनिया में कई लव-स्टोरी पहली नज़र से शुरू हुई हैं। समर्थ ने अपने कई दोस्तों को इस पहली नज़र का शिकार होते देखा था, लेकिन उसने कभी सोचा ही नहीं था कि एक दिन आएगा जब वो भी किसी अजनबी की एक झलक के लिए बेक़रार हो जाएगा।

हालातों से हारकर नंदिनी की ज़िंदगी सिमट सी गयी थी। किसी से कोई मतलब नहीं था, अपनी छोटी सी दुनिया में बिज़ी रहती थी। ना किसी चीज़ की आरज़ू, ना कोई सपना, और ना ही कोई अरमान। पर उसे पता नहीं था कि एक दिन कोई फिर उसके मन में वही भूली सी चाहत जगा देगा। दिल फिर से सोए हुए सपनों को देखने की नाकाम कोशिश में लग जाएगा।

 समर्थ जब तक नंदिनी के बारे जान पाया, तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी। समाज की रिवाजों और रिश्तेदारों की पुरानी सोच ने नंदिनी का ब्रेन-वाश कर दिया था। क़दम पीछे हटाना समर्थ की फ़ितरत में नहीं था, और क़दम आगे बढ़ाने में नंदिनी ही रोड़ा बन गयी।  

क्या वह नंदिनी का डर दूर कर, उसे अपने प्रपोज़ल के लिए मना सकेगा? या फिर उसे नंदिनी का ख़याल छोड़ना पड़ेगा? या फिर क़िस्मत का खेल चलेगा?


Book #3: Lafanga (Coming Soon)

तीन बहनों के बीच में अकेला भाई—बहुत प्यार, दुलार और ऐशो-आराम के बीच बड़ा हुआ। बिगाड़ना तो था ही…

देवेंद्र शेरावत के ज़िंदगी में कोई कमी नहीं थी, पैसा, गाड़ी, बिगड़े हुए दोस्त, और आस-पास घूमती हुई लड़कियाँ। सब ठीक चल रहा था लेकिन एक दिन उसकी मुलाक़ात संजना से हो गई।

बातों के बल पर सबकी हवा निकालने में आगे, संजना के लिए जब माँ ने एक दिन झख मारकर कह दिया कि तुम्हें तो वक़ील होना चाहिए, तब से वो देश की सबसे कामयाब लॉयर बनने के सपने देखने लगी थी। इसी मंज़िल की ओर चलते चलते, पता नहीं किस महूरत में शेरावत की फ़ाइल उसके हिस्से में आ गयी। 

एक भी हफ़्ता ऐसा नहीं था जब उसे देवेंद्र को किसी ना किसी मुश्किल से निकालना ना पड़ा हो। वो इतनी बिज़ी रहती थी कि उसके बॉस उसे कोई और बड़ा केस देते ही नहीं थे। जब कोर्ट-रूम देखे हुए मुद्दत हो गई तो लगा कि देवेंद्र टाइप के लफ़ंगे का इलाज उसे ख़ुद ही करना पड़ेगा।

क्या संजना उसे सुधार पाएगी? 

क्या देवेंद्र सुधरने वालों में से था?